'जनता की मित्र है पुलिस -किशोर कौशल, एसएसपी धनबाद
August 21, 2019 • Bishan Gupta

रिपोर्ट - पवन मोदी 

कानून व्यवस्था की बात हो या अपराधों पर नियंत्रण की या फिर साम्प्रदायिक सदभाव बनाये रखने की, आईपीएस अधिकारी किशोर कौशल हमेशा अपने काम में खरे उतरे हैं। अभी कुछ महीने पहले ही उन्होंने धनबाद के पुलिस अधीक्षक का पद संभाला है, जिसके बाद से जिले में न केवल अपराधों पर अंकुश लगा है, साथ ही जिले की कानून व्यवस्था में भी अभूतपूर्व सुधार देखने को मिल रहा है। इसके अलावा कोयला नगरी के रूप में विख्यात धनबाद में कोयले की चोरी और तस्करी में भारी कमी आयी है, इस बात की तस्दीक आंकड़े भी करते हैं। उनकी कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भावना का ही नतीजा है कि उन्हें कई पुरूस्कारों से सम्मानित किया गया है । 

झारखंड के गिरीडीह जिला के खेतको बागोदर गांव में जन्में किशोर कौशल पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहे । लेखनी के शौकीन किशोर ने दिल्ली के आईएमसी से पत्रकारिता की डिग्री ली और कुछ समय तक उन्होंने एक पत्रकार के रूप में न्यूज एजेंसी यूएनआई में काम किया। 2012 में वह पुलिस सेवा में आये। अभी वो धनबाद में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात हैं। इस दौरान उन्होंने अपनी कुशल रणनीति और सूझबूझ से कई अहम केसों को सुलझाया। उन्हें राज्य में एक तेजतर्रार पुलिस अधिकारी के तौर पर जाना जाता है। यही कारण है कि अपराधी उनके नाम से ही खौफ़ खाते हैं। उनका रिकॉर्ड भी कहता है, कि जहां भी उनकी तैनाती हुई, अपराधों में भारी कमी देखने को मिली। इसके पीछे जहां उनकी अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति रही हैं, वहीं आम जनता को साथ लेकर चलने की रणनीति भी। किशोर कौशल ने पुलिस महकमे को सीधे जनता से जोड़ने की पहल की है। उन्होंने हमेशा ही अपने क्षेत्र में सामाजिक कार्य करवाये हैं, चाहें वो गरीब बच्चों की पढ़ाई का विषय हो या लोगों की समस्यायों को सुलझाने की बात हो या फिर पति-पत्नी और परिवारों के आपसी झगड़ों को निपटाने का मामला हो, किशोर कौशल ने बाकायदा इसके लिए अपने मातहत अधिकारियों को निर्देश दिये हैं, कि वो जनता के कामों को भी उतनी ही प्रमुखता दें, जितना उनकी सुरक्षा को देते हैं। किशोर कौशल का मानना है कि जनता की मदद के बिना अपराधों पर अंकुश लगाना संभव नहीं है, इसलिए सबसे पहले पुलिस को अपनी । छवि बदलनी पड़ेगी। पुलिस को लोगों को समझाना होगा कि वो पुलिस से डरें नहीं। पुलिस उनकी सुरक्षा के लिए है। वो उनकी मित्र है। इसलिए उनकी कोशिश रहती है कि वो ज्यादा से  ज्यादा जनता के बीच जायें, उनके त्यौहार और  दूसरे सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल हों। अगर पुलिस विभाग को किसी सार्वजनिक प्रोग्राम में आमंत्रित किया जाता है, तो ऐसे कार्यक्रमों में वो स्वयं या अपने किसी प्रतिनिधि को जरूर भेजते हैं। इसके साथ ही वो समय-समय पर पुलिस-पब्लिक सम्मेलन भी करवाते हैं, इससे आम जनता में पुलिस की बेहतर छवि बनाने में मदद मिलती है । वरना तो, झारखंड में लोगों के बीच यह धारणा आम है कि पुलिस ने ना दोस्ती अच्छी, ना दुश्मनी । यही कारण है कि पुलिस को देखकर लोग कट लेते हैं। वो तभी पुलिस के पास जाते हैं, जब उनका स्वयं का या फिर उनके किसी करीबी का कोई मामला हो। आम लोगों के बीच पुलिस की इस इमेज को बदलना जरूरी है। लोगों की सहभागिता के बलबूते पर ही पुलिस अपने काम को सही अंजाम तक पहुंचा पाती है

 

हम सभी जानते हैं कि धनबाद जिला बहुत बडा जिला है। बड़ा जिला होने के कारण यहां अपराध की घटनाएं को रोकने मे पुलिस कर्मियों  को बहुत ही चुनौतियों  का सामना करना पड़ता है। वही दूसरी ओर धनबाद आर्थिक गतिविधियों का केंद्र होने के कारण आर्थिक अपराध से जुड़े अपराधियो से निपटना निश्चित तौर पर एक चुनौती है।

उनका कहना है कि इस भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने में ही व्यस्त रहते हैं। उन्हें यह भी नहीं पता होता कि उनके पड़ोस में कौन रहता है। अपराधी इसका फायदा उठाते हैं । वो अपराधों को अंजाम देकर रफूचक्कर हो जाते हैं। इसलिए लोगों को चाहिए कि वो अपने आसपास के संदिग्ध लोगों पर पैनी नजर रखें। किरायेदार रखते समय उसका पुलिस वैरिफ़िकेशन जरूर करवायें। इसके साथ ही किशोर कौशल का कहना है कि लोग अपराधियों से डरें नहीं, बल्कि उनके बारे में तुरंत ही पुलिस को सूचित करें। वो अपराधों पर अंकुश नहीं लगने का एक कारण इसे भी मानते हैं। लोग अपराधियों के बारे में सूचना देने से बचते हैं। इसका अहम कारण है, उनके अन्दर असुरक्षा की भावना। पुलिस पर उनका वो भरोसा नहीं रहता, जो होना चाहिए। इसके लिए पुलिस को अपनी ओर से भी प्रयास करने होंगे, लोगों का भरोसा जीतना होगा। उन्हें यह यकीन दिलाना होगा कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर व खतरनाक क्यों ना हो, वो कानून के लम्बे हाथों से नहीं बच सकता। पुलिस पैट्रोलिंग का मकसद भी यही है कि पुलिस और पब्लिक के बीच की खाई को पाटकर अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके। 

धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षक किशोर कौशल से अराइज न्यूज़ के प्रतिनिधि पवन मोदी ने विभिन्न मामलों पर लंबी बातचीत की बातचीत के मुख्य अंश :

आप आईपीएस ऑफिसर नहीं होते, तो आप क्या बनना पसंद करते? मैंने देश के सबसे बड़े पत्रकारिता संस्थान आई आईएमसी से पत्रकारिता की डिग्री ली हैयदि आज मैं आइपीएस ऑफिसर नहीं होता तो निश्चित ही पत्रकार होता।

धनबाद एक चुनौतीपूर्णशहर है। इसे आप किस नजरिए से देखते हैं?

हम सभी जानते हैं कि धनबाद जिला बहुत बड़ा जिला है। बड़ा जिला होने के कारण यहां अपराध की घटनाएं को रोकने में पुलिस कर्मियों को बहुत ही चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। वहीं दूसरी ओर धनबाद आर्थिक गतिविधियों का केंद्र होने के कारण आर्थिक अपराध से जुड़े अपराधियों से निपटना निश्चित तौर पर एक चुनौती है।

आम जनता पुलिस के सामने आने से कतराती है। आम जनता और पुलिस में समन्वय कैसे बढ़ाया जा सकता है? आपकी क्या योजना है?

यह सच है कि आम जनता पुलिस के सामने आने से कतराती है. हमारी कोशिश है कि पुलिस और आम जनता के बीच की दूरी कम की जाए । इसके लिए हम लोग हर दूसरे और चौथे मंगलवार को थाना दिवस मनाते हैं इस मौके पर छोटे-मोटे मामलों को थाना में ही समझौता करा दिया जाता है । यह प्रक्रिया ग्रामीण स्तर पर काफी सफल हुई है । शहरी क्षेत्र में भी नागरिकों का साथ मिल रहा है। पुलिस और जनता के बीच के बेहतर समन्वय के लिए हम लोग प्रयासरत हैं। अब प्राथमिकी दर्ज करना भी  आसान हो गया है । इसके अलावा लोग मुझसे कभी भी किसी भी समय मिल सकते हैं समाज में कुछ कुरूतियां ऐसी हैं, जो अपराध है जैसे महिलाओं को डायन समझ कर उनकी हत्या कर देना या मारपीट करना गैरकानूनी है। हाल ही में मॉब लिंचिंग के मामले देखने को मिले हैं। इसके बारे में जनता को जागरूक होना बहुत जरूरी है । यदि कोई व्यक्ति या नागरिक ऐसी घटना को अंजाम देता है, तो ये सरासर गैरकानूनी है और उसे अपराधी समझा जाता है।

आम जनता आखिर क्यों स्थानीय प्रशासन पर भरोसा ना करके जिला प्रशासन पर भरोसा करती है और अवैध कोयला तस्करी की सूचना एसओजी टीम को देना उचित समझती है? आखिर कब तक अवैध कोयला माफियाओं पर अंकुश लगेगा?

कोयले से जुड़े अपराधों पर अंकुश लगाना मेरी सबसे पहली प्राथमिकता है। बड़े अपराधियों के खिलाफ हम लोग राणनीति के तहत योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहे हैं। मैंने पिछले 10 से 15 सालों के अपराध के आंकड़े निकलवाए हैं । उनको आधार बनाकर हम कार्रवाई कर रहे हैं । जहां तक पुलिस वालों की संलिप्तता का सवाल है, हम किसी भी तरह की शिकायत आने पर साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई करेंगे। जो भी पुलिसकर्मी कोल माफियाओं से मिले रहेंगे, उनके ऊपर कार्रवाई होगी। साइबर क्राइम से कैसे निपटेंगे? इससे निपटने के लिए आपकी योजना क्या है?

हम साइबर अपराध से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। कुछ दिनों पहले ही हमने  एटीएम का क्लोन बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया । साथ ही धनबाद में अलग से एक साइबर सेल बनाया गया है, जहां डीएसपी लेवल के पदाधिकारी कार्य करते हैं। लोगों को साइबर अपराध से निपटने में जागरूक होना बहुत जरूरी है। लोगों को जागरूक करने के लिए हाल ही में एक कार्यशाला का आयोजन कराया गया था, जिसमें कोलकाता से आए विशेषज्ञों ने साइबार अपराध से जुड़ी तकनीकी पहलुओं से हमारे पदाधिकारियों को अवगत कराया।

धनबाद शहर को अपराध मुक्त कैसे बनाएंगे। साथ ही साथ महिलाओं की सुरक्षा के लिए क्या  योजनाएं है?

धनबाद शहर को अपराध मुक्त बनाने के लिए हमने कुछ प्राथमिकताएं तय की हैं, जैसे संगठित और आर्थिक अपराध पर नियंत्रण करना, व्यवस्था को दुरुस्त करना, पुलिस पब्लिक की दूरी कम करना और अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से अपराध एवं पूर्ण नियंत्रण की दिशा में आगे बढ़ना अपराध और अपराधियों को चिन्हित कर हम अपनी कार्रवाई कर रहे हैंसाथ ही साथ अपराधियों की सूची तैयार की है। दूसरी ओर निगम के सहयोग से शहर के प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके तहत हमने सभी बड़े संस्थानों से अनुरोध किया है कि एक कैमरा बाहर सड़क की तरफ भी लगाएं। इसके अलावा ऐसे कैमरे भी कई जगह लगाए गए हैं जिनसे वाहनों का नंबर ट्रैक किया जा सकता है। जहां तक महिलाओं की सुरक्षा की सवाल है, महिलाओं की सुरक्षा के लिए हमारी पुलिस प्रतिबद्ध है। धनबाद में एक महिला थाना सुचारू रूप से काम कर रहा है, जहां मामलों के निपटारे के लिए हमारे पदाधिकारी दिन रात लगे हुए हैं। आज प्राथमिकी दर्ज करना भी आसान हो गया है। यही वजह है कि शिकायतों की संख्या बढ़ रही है। हमने महिला कॉलेज के आसपास पुलिस की गश्त बढ़ा दी है। साथ ही कोई शिकायत आने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है।

सदानंद सुमन, ईसीएल महाप्रबंधक

वरीय पुलिस अधीक्षक किशोर कौशल के नेतृत्व में कोयला छापेमारी अभियान बहुत सफल हुआ है। इससे कोल माफियाओं में हड़कंप का माहौल बना हुआ है। हाल ही में एसओजी टीम ने मुग्मा एरिया में छापेमारी करके लगभग 80 टन कोयला जब्त किया है।

अमन कुमार, ग्रामीण पुलिस अधीक्षक

किशोर कौशल सर ने आर्थिक अपराध को रोकने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। जनता और पुलिस के बीच एक  अच्छा समन्वय बन सके, इसके लिए प्रत्येक थाने में दूसरे और चौथे मंगलवार को थाना दिवस के रूप में मनाया जाता है, जहां जनता से संबंधित समस्याओं को सुना जाता है ।

विजय कुमार कुशवाहा, एसडीपीओ निरसा

वरीय पुलिस अधीक्षक हम लोगों को बहुत सहयोग करते है। नियम कानून के लिहाज से सर सख्त है। समय समय पर वो हम लोगों को सही रूप से मार्गदर्शन भी करते रहते है। साफ़ शब्दों में कहा जाए तो सही के लिए अच्छे और अवैध कारोबारियों के लिए काफी सख्त है।

मेजर राजा पॉल, डिॉटी चीफ ऑफ सिक्योरिटी

वरीय पुलिस अधीक्षक किशोर कौशल के निर्देशानुसार निरसा क्षेत्र के एसडीपीओ विजय कुशवाहा के नेतृत्व में लगातार अवैध कोयला छापेमारी छापेमारी अभियान से कोयला माफियाओं में हड़कंप का माहौल बन चुका है। साथ ही साथ वो ईसीएल सिक्योरिटी टीम के साथ अच्छा समन्वय बनाकर चल रहे हैं और हर संभव मदद करते हैं। आशा करते हैं कि इसी तरह ईसीएल सिक्योरिटी को स्थानीय प्रशासन से भी मदद मिलेगी।