कांग्रेस में बवंडर
July 18, 2019 • Bishan Gupta

लोकसभा चुनाव की हार से कांग्रेस में तूफ़ान आ गया है। राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा क्या दिया, पार्टी में इस्तीफ़ों की मानों झड़ी लग गयी। राहुल गांधी के समर्थन में कांग्रेस के छोटे से लेकर बड़े दर्जनों नेताओं ने पार्टी पदों से इस्तीफ़ा दे दिया। कांग्रेस के बड़े नेता ज्योतिरदित्य सिंधिया ने पार्टी महासचिव पद से इस्तीफ़ा दे दिया। सिंधिया ने इस्तीफ़े का ऐलान करते हुए कहा, कि में जनादेश को स्वीकार करते हुए हार की जिम्मेदारी लेता हूं। मैंने राहुल गांधी को कांग्रेस महासचिव पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। पार्टी की सेवा का अवसर देने के लिए मैं उनका धन्यवाद करता हूं। ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी इस बार लोकसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था। वो अपनी परंपरागत गुना सीट से बड़े अन्तर से चुनाव हारे हैं। गुना सीट से ज्योतिरादित्य सिंधिया पिछले चार बार से लगातार चुनाव जीतते आ रहे थे। राज्य के मुख्यमंत्री कमलनाथ भी प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे चुके हैं। वहीं मुम्बई कांग्रेस के अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा ने भी अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। उन्होंने आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए एक तीन सदस्यीय समिति बनाने का सुझाव दिया है, जो राज्य कांग्रेस का नेतृत्व करेगी। इससे पहले महाराष्ट्र में पार्टी के बड़े नेता और किसान कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़ा दे चुके हैं.। नाना पटोले खुद भी भाजपा के बड़े नेता नितिन गडकरी के ख़िलाफ़ लोकसभा चुनाव लड़े थे, लेकिन उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। इसके साथ ही कांग्रेस सचिव और राजस्थान के सह प्रभारी तरूण कुमार ने भी अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। इससे पहले विभिन्न राज्यों में दर्जनों पदाधिकारी अपने पद से इस्तीफ़ा दे चुके है। हालांकि पार्टी में अभी तक किसी भी नेता का इस्तीफ़ा स्वीकार नहीं हुआ है, क्योंकि राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने बाद पार्टी को नया अध्यक्ष अभी तक नहीं मिला है और इन सभी इस्तीफ़ों पर कांग्रेस के नये अध्यक्ष को ही फैसला लेना है। लोकसभा चुनाव में हार से कांग्रेस पार्टी इस कदर हलकान है, कि कई राज्यों की प्रदेश कमेटियां भंग कर दी गयी हैंविभिन्न राज्यों में पार्टी पदाधिकारी हार का ठीकरा एक दूसरे पर फोड़ रहे हैं, जिससे ज्यादातर राज्यों में पार्टी दो फ़ाड़ होती हुई दिखाई दे रही है। मीडिया में जब यह खबरें आई कि लोकसभा चुनाव में राजस्थान और मध्यप्रदेश में पार्टी की हार के लिए राहुल गांधी ने खुलेतौर पर इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को जिम्मेदार ठहराया है, तो पार्टी में मानों भूचाल आ गया। राहुल के हवाले से कहा गया, कि राजस्थान और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री अपने ही बेटों को जिताने में लगे रहे। उन्होंने अपने राज्यों में दूसरे पार्टी प्रत्याशियों की चिंता नहीं की, जिसके चलते दोनों राज्यों में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा । राजस्थान में पार्टी राज्य की सभी लोकसभा सीटें हार गयी। राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद अपने बेटे वैभव गहलोत को चुनाव नहीं जिता पाथे। मध्यप्रदेश में भी पार्टी की कम दुर्गति नहीं हुयी। राज्य की 29 लोकसभा सीटों में से 28 सीटों पर कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा। केवल छिंदवाड़ा सीट पर मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ को जीत मिलीहालांकि लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को इन दोनों राज्यों में अच्छे प्रदर्शन कीउम्मीद थी, क्योंकि इन दोनों राज्यों में कुछ महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंका था। राजस्थान में पार्टी की हार के लिए राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के गुट एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैराज्य में पार्टी के दोनों गुटों में आपसी खींचतान इतनी तीव्र है, कि राज्य में सत्ता और संगठन में बदलाव की मांग जोर पकड़ रही हैं। वैसे भी कांग्रेस हाईकमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कार्यप्रणाली से ज्यादा खुश नहीं है। वहीं मध्यप्रदेश में यह आम चर्चा है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्य में एक-एक करके अपने विरोधियों को निपटा दिया है पहले उन्होंनेदिग्विजय सिंह को भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए भेज दिया, जहां से उनकी हार पहले से ही तय थी। उसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया की हार ने सब कुछ बयां कर दिया कि राज्य में पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा।वरना ऐसा क्या हुआ कि राज्य में 5 महीने पहले ही विधानसभा चुनाव जीतने वाली कांग्रेस पार्टी की ऐसी दुर्गति क्यों हुई। महाराष्ट्र में भी पार्टी के अन्दर आपसी लड़ाई कम नहीं है। इसकी बानगी तब देखने को मिली, जब मुम्बाई कांग्रेस के अध्यक्ष मिलिन्द देवड़ा ने अपने पद से इस्तीफ़ा दिया। उनके इस्तीफ़े पर मुम्बई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरूपम ने तंज कसा है। उन्होंने इशारों-इशारों में देवड़ा पर हमला बोला है। उन्होंने देवड़ा के इस्तीफ़े को ऊपर चढ़ने की सीढी करार देते हुए कहा कि पार्टी को ऐसे कर्मठ लोगों से सावधान रहना पंजाब में कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव में बोहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन इसके बावजूद राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह और उनके कैबिनेट सहयोगी नवजोत सिंह सिद्धू  के बीच तलवारें खिंची हुई हैं .। मुख्यमंत्री अमरिन्दर सिंह ने राज्य में लोकसभा चुनाव में कुछ सीटों पर हार के लिए सीधे-सीधे सिद्ध को जिम्मेदार ठहराया है,जिसके बाद सिद्धू को अमरिन्दर कैबिनेट से इस्तीफ़ा देना पड़ा । इससे पहले भी अमरिन्दर सिंह कह चुके हैं कि नवजोत सिंह सिद्धू उन्हें हटाकर खुद राज्य का मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। 

लोकसभा चुनाव में कर्नाटक में कांग्रेस-जनता दल सेकुलर गठबंधन की हार क्या हुई, दोनों दलों के बीच लड़ाई सतह पर आ गयीदोनों दलों के नेता इस हार का ठीकरा जहां एक दूसरे पर फोड़ रहे हैं, तो वहीं राज्य कांग्रेस में भी बिखराव की स्थिति है। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरमैया की कार्यशैली से नाराज होकर कांग्रेस के कई विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफ़ा भेज दिया है, जिससे राज्य की कुमारस्वामी सरकार गिर गयी और राज्य में एक बार फिर भाजपा की सरकार बन गयी । कांग्रेस में इस्तीफ़ों का दौर कब ख़त्म होगा, कहा नहीं जा सकता। कुछ लोग इसे राहुल गांधी के समर्थन के तौर पर देख रहे हैं, तो कुछ इसे दबाव की राजनीति के रूप में, ताकि उन्हें नये अध्यक्ष की टीम में जगह मिल जाये। मामला चाहें जो हो, लेकिन इससे इतना तो तय है कि काग्रेस दिन-ब-दिन कमजोर हो रही है।