कैंसर रोगियों को नया जीवन दे रहा है पंचगव्य उपचार
August 23, 2019 • Bishan Gupta

कैंसर को दुनिया की सबसे लाइलाज बीमारी माना जाता है। इस भयानक बीमारी का पता जब मरीज को चलता है तब बहुत देर हो चुकी होती है। ज्यादातर कैंसर रोगियों का इलाज महंगा और बहुत कष्टदायक होता है। भारत में कैंसर के रोगियों को राहत देने और सस्ते इलाज के लिए लगातार नए-नए शोध हो रहे हैं और देशभर में कैंसर के इलाज के अस्पताल खुल रहे हैं। मगर फिर भी आयुर्वेद और पंचगव्य ने कैंसर जैसे असाध्य रोग का सफल इलाज तलाश लिया है। भारत की प्राचीन इलाज पद्धति और आयुर्वेदिक दवाओं से कैंसर का सफल उपचार किया जा रहा है। देश में आयुर्वेदिक दवाओं और पंचगव्य से कैंसर रोगियों का इलाज किया जा रहा है। शुरूआती रुझानों में आयुर्वेदिक विशेषज्ञों को इस दिशा में बड़ी सफलता मिली है। देश में कई पंचगव्य संस्थानों द्वारा कैंसर रोगियों पर शोध किया जा रहा है और इलाज के लिए नई दवाओं की खोज भी की जा रही है। दरअसल प्राचीन भारतीय इलाज पद्धति आयुर्वेद में पंचगव्य पद्धति को बहुत महत्व दिया गया है। पंचगव्य देशी गाय के गोबर, गोमूत्र, घी, दूध एवं दही के मिश्रण से बनी दवाई होती है । इस मिश्रण में आयुर्वेद की अन्य औषधियों को शामिल कर कैंसर रोगियों को दिया जाता है। पंचगव्य के मिश्रण से बने अर्क और लेप से मरीजों को फायदा हो रहा है । इस पर शोध करने वाले वैद्य बताते हैं कि कैंसर की शुरूआती दशा में अगर मरीज उनके पास आ जाते हैं तो निश्चित तौर पर कैंसर को एक साल के इलाज के बाद जड़ से समाप्त किया जा सकता है। 

दिल्ली के पंजाबी बाग (शिवाजी पार्क) इलाके में पंचगव्य पद्धति से कैंसर का सफल इलाज किया जा रहा है। शिवाजी पार्क में गोधाम पंचगव्य आयुर्वेदिक चिकित्सालय में पंचगव्य पर शोध करने वाले प्रवीण वैद्य मरीजों का सफल इलाज कर रहे हैं । इस अस्पताल की खास बात यह है कि अस्पताल ने पंचगव्य के मिश्रण के लिए स्वयं की एक गऊशाला की स्थापना की है। इसी गऊशाला से पंचगव्य तैयार किया जाता है। इस चिकित्सालय में देश के दूर-दराज के इलाकों से लेकर विदेश तक से मरीज इलाज कराने आ रहे है। एक पंजीकृत चैरिटेबिल संस्था द्वारा संचालित इस चिकित्सालय का आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों सहित एम्स के डॉक्टरों द्वारा भी सराहा जा चुका है। इस चिकित्सालय में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को एक अनुशासित परिवेश में रखा जाता है जहां पूरी दिनचर्या पंचगव्य चिकित्सा प्रणाली द्वारा ही चलती है । मरीजों को खाना-नाश्ता इत्यादि भी चिकित्सालय द्वारा दिया जाता है जिसे वैद्य की देखरेख में बनाया जाता है। कैंसर के मरीजों के खानपान को लेकर यहां विशेष सतर्कता बरती जाती है। चिकित्सालय के अनुभवी वैद्य भरत मुरारी बताते हैं कि हरियाणा के हिसार जिले से पिछले दिनों एक महिला कैंसर का इलाज कराने चिकित्सालय आई थी। दरअसल वह महिला अनुवांशिक कैंसर की बीमारी से पीड़ित थी। महिला की मां और नानी भी कैंसर से पीड़ित थी। शादी के बाद जब महिला गर्भवती नहीं हो पाई तो उसकी उच्चस्तरीय जांच से कैंसर के शुरूआती लक्षणों का पता चला ।  प्रचलित चिकित्सा प्रणाली में उक्त महिला का इलाज लंबा और बेहद खर्चीला था। इलाज के लिए जब वह महिला गोधाम पंचगव्य आयुर्वेदिक चिकित्सालय पहुंची तो यहां महिला का सफल इलाज किया गया। वह मां बनी और कैंसर को पंचगव्य ने जड़ से खत्म कर दिया। वैद्य भरत मुरारी कहते हैं कि देशभर में अब पंचगव्य पर लोगों का भरोसा बन रहा है। वे कहते हैं कि अनुवांशिक तौर पर कैंसर को खत्म करने के लिए भी पंचगव्य सटीक साबित हो रहा है। पंचगव्य के विशेषज्ञों का कहना है कि देशी गाय के गोबर का लेप कैसर रोगियों के लिए बहुत अच्छा रेडिएशन साबित होता है, जबकि कीमोथेरेपी कैंसर रोगियों के लिए बेहद कष्टदायक इलाज होता है। ऐसे में देशी गाय के उत्पाद से बना पंचगव्य कैंसर रोगियों के लिए नया जीवन लेकर आ रहा है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा भी पंचगव्य के इलाज को मान्यता दी गई है। देशभर में अब इस इलाज पद्धति पर नए-नए शोध हो रहे हैं, ताकि कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी से भारत को मुक्त किया जा सके। प्राचीन भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में देशी गाय को बेहद अनमोल बताया गया है। देशी गाय के दूध, दही, घी, मक्खन, गोबर और गोमूत्र को आयुर्वेद में अमृत की संज्ञा दी गई है। पंचगव्य का अर्क बनाने के लिए इसमें तुलसी, आवंला, गिलोय, हल्दी, हरसिंगार, सहजन, बथुआ और चौलाई जैसी जड़ी बूटियों का मिश्रण पंचगव्य के अर्क में मिलाया जाता है। देश में पंचगव्य पर निरंतर शोध हो रहे हैं। गुजरात के वलसाड़ में पंचगव्य पर रिसर्च करने वाली एक आधुनिक प्रयोगशाला वलसाड़ के चिकित्सालय में काम कर रही हैं। दरअसल देश में ज्यादातर लोगों की जीवनशैली बेहद खराब होती जा रही है। खानपान, रहन-सहन, तनाव, प्रदूषण, हानिकारक कीटनाश्क, मिलावटी खाद्य पदार्थ और दैनिक प्रयोग में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री से कैंसर जैसा भयानक रोग भारत में पैर पसार रहा है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय कैंसर के प्रति देशभर में जागरुकता अभियान चला रहा है, मगर यह कैंसर जैसे रोग से लड़ने के लिए पर्याप्त कदम नहीं है। दूसरी तरफ कैंसर जैसी बीमारी के इलाज के लिए निजी और सरकारी अस्पताल भी काम कर रहे है। मगर कैंसर का एलोपैथिक इलाज काफी लंबा, खर्चीला और कष्टदायक है। ऐसे में पंचगव्य कैंसर रोगियों के लिए एक वरदान की तरह सामने आ रहा है। अच्छी बात यह है कि पंचगव्य से इलाज को लेकर देशभर में लोगों की धारणा बदल रही है। पंचगव्य की सटीक दवाईयों के प्रति लोगों का भरोसा कायम हो रहा है जो इस बात का परिचायक है कि देश प्राचीन आयुर्वेदिक पद्धति की तरफ लौट रहा है । कैंसर ही नहीं, बल्कि दूसरी तमाम असाध्य बीमारियों के इलाज के लिए भी पंचगव्य की औषधियां अमृत साबित हो रही हैं। पंचगव्य से बनी दवाईयों को एलोपेथिक वैज्ञानिकों ने जब अपनी कसौटी पर कसा तो सौ प्रतिशन खरा पाया। पंचगव्य को लोकप्रिय बनाने के लिए सरकार को भी आगे आना चाहिए। अगर सरकार पंचगव्य के लिए शोध के रास्ते खोले और नई-नई बीमारियों के प्रति नई-नई दवाईयां विकसित करने के लिए प्रोत्साहन दे, तो निश्चित तौर पर यह पद्धति भारत के आयुर्वेदिक चिकित्सा के गौरव को स्थापित करने का काम करेगी। 

गौधाम पंचगव्य आयुर्वेदिक चिकित्सालय शिवाजी पार्क, दिल्ली।

 वैध भरत मुरारी जी से नीचे लिखे नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। संपर्क : 9979468044