बाबा नीब करोरी ने बचाया था डूबता फेसबुक?
August 1, 2019 • Bishan Gupta

कहते हैं यहीं पर उन्हें राम भी मिले और हनुमान भी। हो सकता है नास्तिकों को ये बातें कुछ नागवार गुजरें ,लेकिन आस्तिक-नास्तिक कुछ होता नहीं है। जिसकी पहुंच जहां तक है,वह वहीं से संसार को पकड़ने लगता है। बाबा की पहुंच कहां तक थी, इसका अंदाजा कोई नहीं लगा पाया। आज जब बाबा के करिश्मों के किस्से सामने आ रहे हैं तो यकीनन कहा जा सकता है कि उनके तार ब्रह्मांड की परम शक्ति से सीधे जुड़े रहे।

जिनके आश्रम और आशीर्वाद के चर्चे आज दुनिया भर में हैं, उन्होंने ही बदली है, स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग की जिंदगी। सारी दुनिया को बेहतरीन आई फोन देने वाली कंपनी एपल के मालिक स्टीव जॉब्स और फेसबुक बनाने वाले मार्क जुकरबर्ग ने सिर्फ माना ही नहीं, बल्कि इस बात की सारे जहां मुनादी भी की, कि आज जो भी उनके पास है और वे जिस मुकाम पर काबिज हैं, वो बाबा नीब करोरी की ही कृपा से संभव हुआ है। हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री जब अमेरिका के दौरे पर गए, तो उस दौरान उनकी मुलाकात फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग  से हुई। मार्क ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बताया कि उनकी जिंदगी में एक ऐसा भी दौर आया, जब उनका कारोबार रसातल में चला गया और नौबत यहां तक आ गई कि वह पाई-पाई के लिए मोहताज हो गए। मार्क कहते हैं उस वक्त उनके दोस्त स्टीव जॉब्स जो कि एपल कंपनी के मालिक थे, उन्होंने सलाह दी कि मैं हिंदुस्तान में बाबा नीब करोरी के कैंचीधाम आश्रम जाऊं। मार्क ने पीएम से बताया- आखिर मरता क्या न करता, मैं वक्त निकाल कर हिंदुस्तान बाबा के आश्रम पहुंचा। जुकरबर्ग बताते हैं कि वहां से लौटने के बाद मैंने मुड़कर नहीं देखा और बुलंदियों को छूता गया, आज जिस मुकाम पर खड़ा हूं, वह उस महा संत की ही रहमत है। मार्क जुकरबर्ग जब अमेरिका से करीब साढ़े आठ हजार किमी का सफर करके उत्तराखंड के कैंचीधाम पहुंचे, तब उनका फेसबुक  लाखों  करोड़ का नहीं था और वे संघर्ष के दौर से गुजर रहे थे, जिससे निकल पाना उनके बूते की बात नहीं थी।

उत्तराखंड के नैनीताल से करीब 38 किलोमीटर दूर है बाबा नीब करोरी का कैंचीधाम आश्रम।  दुनिया की  बड़ी टेक कंपनी एपल के फाउंडर स्टीव जॉब्स नीब करौली बाबा से आशीर्वाद लेने उनके आश्रम कैंचीधाम आए थे। वे बाबा से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने अपने जीवन के बाकी समय को बाबा के साथ उनके आश्रम में बिताने का फैसला कर लिया और साल 1974 में वे कैंचीधाम फिर से आए। इस बार जॉब्स का इरादा संन्यास लेने का था लेकिन जब वे आश्रम में पहुंचे तो उनकी नीब करोरी बाबा से मुलाकात नहीं हो पाई थी, क्योंकि 11 सितंबर 1973 को बाबा ने अपना शरीर त्याग दिया था। इस पर स्टीव को बहुत ही दुख हुआ था लेकिन अचानक उन्हें महसूस हुआ कि मानों बाबा साक्षात उनके सामने आ गए और उनसे कह रहे हों- नहीं, स्टीव नहीं, अभी तुम्हारा वक्त संन्यास का नहीं है, दुनिया की सभ्यता को तुम्हारी जरूरत है, जाओ, वापस लौट जाओ। स्टीव जॉब्स कहते हैं कि आश्रम से लौटने के बाद उनकी दुनिया बदल गई। अगर स्टीव जॉब्स संन्यास लेते, तो वे दुनिया के लिए क्या करते, पता नहीं। लेकिन संसार में लौटकर संसार के लिए उन्होंने जो किया, उसने अकेले दम पर, उनके प्रयास ने मानवीय सभ्यता को एक पायदान ऊपर उठा दिया है। बेरोजगार युवा स्टीव जॉब्स पहली बार अपने मित्र डैन कोटके के साथ बाबा नीब करोरी के दर्शन करने आए थे और इसके बाद उनका उनका नाम बाबा के परम भक्तों की लिस्ट में दर्ज हो गया।

यूपी के फर्रुखाबाद जिले में गंगा के कछार पर बसा एक एक गांव है जिसका नाम नीब करोरी है। फिरोजाबाद के अकबरपुर का घर छोड़ने के बाद पंडित लक्ष्मी नारायण शर्मा इसी नीब करोरी गांव पहुंचे थे। अनुमान है कि वे इस जगह पंद्रह से बीस साल रहे। अपनी समस्त साधनाएं उन्होंने इसी जगह पर पूरी की। अपने ही हाथ से बनाए माटी-गोबर के हनुमान जी से ही उन्हें समस्त सिद्धियां मिलीं। पंडित लक्ष्मी नारायण शर्मा से लक्ष्मण महराज और फिर बाद में तो नीब करोरी वाले बाबा के नाम से ही लोग उन्हें जानने लगे। इस जगह को उनकी तपस्थली कहा जाता है। कहते हैं कि यहां आज जो हनुमान मूर्ति है, वह उन्हीं के द्वारा साल 1915 के आसपास बनाई गई थी, माटी और गोबर से। आज करीब सौ साल बाद भी यह मूर्ति जस की तस है। यहां एक वृक्ष है, एक गुफा है, एक कुआं है और राख से भरा एक ऐसा ढेर है जो संभवतः नीम करोरी बाबा की यज्ञशाला थी या शायद वे यहां बैठकर आग तापते थे और जो कोई कुछ देता था, वे इसी यज्ञशाला में डाल दिया करते थे। कहते थे कि अग्नि को दे दिया सुरक्षित रखने के लिए, जब जरूरत होगा तो वापस ले लेंगे। यह कोई मजाक नहीं है। इसे चमत्कार मानें तो मानें लेकिन वे अग्नि देवता से वस्तुएं मांगते भी थे ,जितनी जरूरत होती थी, वह अग्निदेवता से मिल जाता था। आग में हाथ डालकर वे जो इच्छा करते, वह उनके हाथ में आ जाती थी। आग से निकालकर कई बार कई सारी चीजें उन्होंने लोगों को दे दी थीं।