भाजपा का फ़िर मन्दिर राग
September 13, 2018 • Bishan Gupta

 

2019 के लोकसभा चुनाव से पहले राम मन्दिर का मुद्दा एक बार फ़िर गरमा गया है। राम मन्दिर मुद्दे को हवा देते हुए उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि अगर राम जन्मभूमि का मुद्दा अदालत या आपसी बातचीत से हल नहीं होगा, तो सरकार संसद में कानून बनाकर राम मन्दिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगी। हालांकि अयोध्या में भव्य राम मन्दिर के निर्माण का भाजपा का पुराना वादा रहा है, और इसी मुद्दे के सहारे उसने सबसे पहले उत्तर प्रदेश और कई दूसरे राज्यों में सरकारें बनाई थी। मन्दिर मुद्दे को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने रथ यात्रा निकाली थी। इसके बाद लोकसभा में भी उसकी ताकत में खासा इजाफ़ा हुआ था। लेकिन साल 1998 में जब पार्टी ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन बनाया और केन्द्र की सत्ता हासिल की, तो कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के चलते तब पार्टी को अपने विवादित मुद्दों राम मन्दिर, धारा 370 और समान नागरिक संहिता को छोड़ना। पड़ा था। इसके बाद से पार्टी के नेता अक्सर राम मन्दिर निर्माण की बात तो कहते रहे हैं, लेकिन । आपसी बातचीत या फ़िर कोर्ट के आदेश से। लेकिन यह पहली बार है, जबा पार्टी के एक बड़े नेता और उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन केशव प्रसाद मौर्य ने एक कदम आगे बढ़कर कहा है कि अगर आपसी बातचीत या फ़िर कोर्ट के द्वारा राम मंदिर का मसला हल नहीं हुआ, तो सरकार के पास मन्दिर बनाने के लिए कानून का रास्ता खुला हुआ है। केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि भाजपा के लिए राम जन्मभूमि का मामला राजनीतिक विषय नहीं है। यह हमारी आस्था, श्रद्धा और विश्वास का विषय है। इसके साथ ही करोड़ों देशवासियों की भावनाएं राम मन्दिर के साथ जुड़ी हैं। मौर्य ने कहा, राम मन्दिर का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और कोर्ट में लगातार इस मुद्दे पर सुनवाई चल रही है। इसके साथ ही कुछ लोग आपसी बातचीत के द्वारा भी इस मुद्दे के हल के लिए सार्थक प्रयास कर रहे हैं और उम्मीद है कि जल्द से जल्द इसका सर्वमान्य हल निकल आएगा। लेकिन अगर ये दोनों प्रयास असफ़ल होते हैं, तो कानून बनाने का तीसरा विकल्प आएगा। हालांकि मौर्य ने संसद के उच्च सदन में पार्टी के पास बहुमत न होने का हवाला देते हुए यह भी कहा, कि अभी राम मन्दिर निर्माण के लिए केन्द्र सरकार कानून नहीं ला सकती, क्योंकि वहां उसे पास कराने में मुश्किल आएगी। उन्होंने कहा, कि राम मन्दिर के निर्माण के लिए केन्द्र सरकार संसद में तभी कानून ला सकती है, जब पार्टी के पास दोनों सदनों में बहुमत हो। मौर्य ने कहा कि अभी पार्टी के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं है। अगर ताजा हालातों में सरकार मन्दिर निर्माण के लिए प्रस्ताव लाती है, तो राज्यसभा में बहुमत ना होने के चलते वो निश्चित रूप से हार जाएगी। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने यह भी कहा, कि अयोध्या में भव्य राम मन्दिर का निर्माण विश्व हिन्दू परिषद के नेता स्वर्गीय अशोक सिंघल, राम जन्मभूमि ट्रस्ट के पूर्व प्रमुख रामचन्द्र दास परमहंस और मारे गये कारसेवकों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। वहीं केशव मौर्थ के ताजा बयान पर तीखी प्रतिक्रिया हुई है। गैर भाजपा दलों का कहना है कि यह एक चुनावी बयान है। हालांकि भाजपा के सहयोगी दलों ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।शायद वो इस मुद्दे पर पार्टी के अधिकारिक बयान की प्रतिक्षा कर रहे हैं। मौर्य के राम मन्दिर पर दिये गये बयान को लेकर कई मुस्लिम संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे गैर जिम्मेदाराना बयान बताया है। इन संगठनों का कहना है कि आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राम मन्दिर मुद्दे को हवा दी जा रही है। सरकार के स्तर पर इस तरह के संवेदनशील मुद्दे पर बयानबाजी ठीक नहीं है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और मस्लिम धर्मगरु मौलाना खालिद रशीद फ़िरंगी महली ने मौर्य के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि चूंकि राम मन्दिर मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए इस मामले में किसी भी तरह की बयानबाजी से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव में लाभ लेने के लिए इस मुद्दे को हवा दी जा रही है। जनता चाहती है कि एक अच्छे माहौल में अदालत के जरिए इसका हल निकले। इस मामले में बाबरी मस्जिद के मुद्दई इकबाल अंसारी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। इकबाल ने कहा कि इस तरह की बयानबजी करके केशव मौर्य अदालत की तौहीन कर रहे हैं। कोर्ट को चाहिए कि ऐसे लोगों पर पाबंदी लगाए। अभी कुछ दिन पहले जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या पहुंचे, तो मन्दिर निर्माण में देरी को लेकर उन्हें संतों की आलोचना का शिकार होना पड़ा। संतों ने कहा था कि अब तो मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक भाजपा के हैं, फिर राम मन्दिर निर्माण में देरी क्यों हो रही है। पार्टी के पूर्व सांसद और संत समाज से तालुक रखने वाले रामविलास वेदांती तो यहां तक कह गये, कि बाबरी ढांचा तोड़ते वक्त क्या किसी की परमिशन ली गयी? मन्दिर निर्माण के लिए भी किसी की परमिशन की जरुरत नहीं है। तब संतों का रवैया देख मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मर्यादा का हवाला देते हुए संतों को थोड़ा और सब्र रखने का आश्वासन दिया था। वहीं भाजपा की अयोध्या में राम मन्दिर की काट के लिए सपा ने भी चाल चल दी है। सपा मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने घोषणा की है कि अगर समाजवादी पार्टी प्रदेश में सत्ता में आयी, तो वो इटावा में भव्य विष्णु मन्दिर बनवाएगी। अखिलेश यादव ने कहा कि वो अखिलेश इटावा की लॉयन सफ़ारी के करीब 2000 एकड़ भूमि पर विष्णु नगर विकसित करेंगे, जिसमें भगवान विष्णु का भव्य मन्दिर होगा। यह विष्णु मन्दिर कंबोडिया के अंकोरवाट मन्दिर की तर्ज पर बनेगा। मन्दिर का अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञों की टीम कंबोडिया जाएगी। उधर राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है। कि 2019 का चुनाव आते-आते मन्दिर मुद्दा एक बार फ़िर जोर पकड़ेगा। इस मुद्दे पर आगे भाजपा क्या स्टैंड लेगी, यह काफ़ी कुछ अगले साल जनवरी में इलाहाबाद में लगने वाले कुम्भ मेले में लगने वाली धर्म संसद के रुख पर निर्भर करेगा। लेकिन अखिलेश यादव की विष्णु मन्दिर बनवाने की घोषणा प्रदेश की सियासत को नया मोड़ जरूर दे सकती है।