कैरितास इंडिया की मानव तस्करी के खिलाफ नेक पहल
July 30, 2020 • Bishan Gupta

किसी व्यक्ति को डराकर, बलप्रयोग कर या दोषपूर्ण तरीके से भर्ती, परिवहन या शरण में रखने की गतिविधि तस्करी की श्रेणी में आती है। दुनिया भर में 80 प्रतिशत से ज्यादा मानव तस्करी यौन शोषण के लिए की जाती है, और बाकी बंधुआ मजदूरी के लिए। सरकार के आंकड़ों के अनुसार हमारे देश में हर 8 मिनट में एक बच्चा लापता हो जाता है। मानव तस्करी के खिलाफ विश्व दिवस प्रत्येक वर्ष 30 जुलाई को मनाया जाता है और यह एक वार्षिक कार्यक्रम है। टीआईपी के खिलाफ विश्व दिवस के लिए 2020 की थीम मानव तस्करी के लिए पहली प्रतिक्रिया देने वालों पर केंद्रित होगी। विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले लोग - तस्करी के पीड़ितों के लिए न्याय की पहचान करना, समर्थन करना, परामर्श देना और न्याय की मांग करना और तस्करों की निष्पक्षता को चुनौती देना। कैरितास इंडिया के सहयोग से संचालित मानव तस्करी रोध( स्वरक्षा) कार्यक्रम पिछले 3 वर्षों से उत्तर प्रदेश के भारत - नेपाल सीमा मे संचालित है, जो महाराजगंज, बहराइच, गोरखपुर, लखनऊ, एवं नेपाल के नेपालगंज जिले के क्षेत्रों में स्थानीय संस्था पूर्वांचल ग्रामीण सेवा समिति गोरखपुर, देहात संस्था बहराइच, डी एस डब्ल्यू लखनऊ, शक्ति समूह नेपाल द्वारा लोगों को जागरूक करने का कार्य किया जा रहा है एवं जिम्मेदार संस्थाओं पुलिस , एसएसबी विभागो को केस की पहचान, कानूनी प्रक्रिया ,पोक्सो , जेजे एक्ट, दस्तावेजीकरण में प्रशिक्षण दिए जाते हैं। गांव में लक्षित परिवार के साथ स्वयं सहायता समूह, यूथ क्लब ,बाल संसद, किसान समूह का गठन करके उनको सश्क्त किया जा रहा है , एवं सरकारी योजनाओं से जोड़ा गया हैचपेट में आने वाले परिवार को चिन्हीकरण करके पंचायत एवं सरकारी विभागों से मिलकर सरकार के कई कार्यक्रमों से जोड़ा गया, इस संदर्भ में बहराइच एवं महाराजगंज जनपद के ठूठीबारी, सुनौली ,नेपालगंज में इंटरसेप्शन बूथ संचालित किए जाते हैं, यहां पर हर आने जाने वालों को वाच किया जाता है एवं शक होने पर उनके साथ काउंसलिंग की प्रक्रिया के साथ आगे की कार्यवाही की जाती है। अब तक एस एस बी, पुलिस, ऑटो बस चालक , समुदाय आधारित संगठन के माध्यम से कुल केस को हस्तक्षेप किया गया है जो इस प्रकार हैं

कुल कार्य क्षेत्र- 4 जिले

गांव की संख्या -37

विगत 3 वर्षों में केस विवरण कुल रेस्क्यू संख्या -290

कुल इंटर्सेप्शन संख्या -303

कुल रिहैबिलिटेशन संख्या - 48

कुल प्रत्यावर्तन संख्या -288

एफ आई आर की संख्या-19

पीड़िता काउंसलिंग एवं अन्य संगठनों के साथ काम करने की अवलोकन के आधार पर विश्लेषण का यह नजरिया सामने आया है कि मांग और आपूर्ति का सिद्धांत लागू होता है। पुरुष काम करने के लिए बड़े व्यवसायिक शहरों की ओर पलायन करते हैं, जिससे व्यापारिक सेक्स की मांग पैदा होती है। इस मांग को पूरा करने के लिए सप्लायर हर तरह की कोशिश करता है जिसमें अपहरण भी शामिल है। गरीब परिवार की छोटी लड़कियों और युवा महिलाओं पर यह खतरा ज्यादा होता है। इसके बाद आता है अन्याय और गरीबी। यदि आप किसी गरीब परिवार में पैदा हुए हैं तो आपके बेचे जाने का खतरा ज्यादा है। यदि आप किसी गरीब परिवार में पैदा हों या लड़की हों तो खतरा और बढ़ जाता है। कभी कभी पैसों की खातिर मां बाप भी बेटियों को बेचने पर आमादा हो जाते हैं। सामाजिक असमानता, क्षेत्रीय लिंग वरीयता, असंतुलन और भ्रष्टाचार मानव तस्करी के प्रमुख कारण हैं। लड़कियों और महिलाओं को ना सिर्फ देह व्यापार के लिए तस्कर किया जाता है बल्कि उन्हें एक सामान की तरह उन क्षेत्रों में बेचा जाता है जहां कन्या भ्रूण हत्या के कारण लड़कियों का लिंग अनुपात लड़कों के मुकाबले बहुत कम है। फिर इन्हें शादी के लिए मजबूर किया जाता है। हर तरफ फैले भ्रष्टाचार और रिश्वत के कारण इन एजेंटों का लड़के और लड़कियां को बेचना आसान है ,लेकिन इन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की जरुरत है जिससे इस समस्या को खत्म किया जा सके। साथ ही लोगों को उनके इलाके में अच्छी शिक्षा और बेहतर सुविधाएं देने की जरुरत है, जिससे मां बाप अपने बच्चों को इस तरह ना बेच सकें। इसके साथ ही लड़कियों और महिलाओं के प्रति नजरिया बदलने की भी जरुरत है ।