किसान मजदूर महासम्मेलन के बहाने जयंत-अखिलेश की जुगलबन्दी
December 18, 2019 • Bishan Gupta

रिपोर्ट -वासिम खान 

 

पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह की जयन्ति के मौके पर २३ दिसम्बर को उत्तर प्रदेश के जिला बिजनौर में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी किसान मजदूर महासम्मेलन कर रहे हैं। इस महासम्मेलन के बहाने दोनों युवा नेता एक बार फ़िर अपनी ताकत का प्रदर्शन करेंगे। दोनों नेताओं की कोशिश है कि इस महासम्मेलन के जरिए सपा -रालोद गठबंधन की ताकत को मजबूत किया जा सके दोनों नेताओं को पता है कि बिजनौर के इस महासम्मेलन के जरिये वो पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को एक बड़ा सन्देश दे सकते हैं, क्योंकि यही वो इलाका है जहां मुस्लिम, जाट और यादव मिलकर भाजपा और बसपा को पटकनी दे सकते हैं पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ज्यादातर सीटों पर मुस्लिम और जाट बहुतायत हैं, जिसका लाभ उन्हें प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों में मिल सकता है। सपा नेता व उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री रहे स्वामी ओमवेश कहते हैं कि किसानों, मजदूरों के मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह की जयन्ति के मौके पर होने वाला यह किसान-मजदूर महासम्मेलन कई मामलों में ऐतिहासिक होगा और प्रदेश में २०२२ में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा के खिलाफ़ एक मजबूत विपक्ष की नींव रखेगा। दरअसल सपा, बसपा और रालोद ने मिलकर २०१९ का लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन इस गठबन्धन को चुनावों में अपेक्षित सफ़लता नहीं मिल पायी थी। जमीनी तौर पर सपा और बसपा के कार्यकर्ता एक नहीं हो पाये , जिसके चलते दोनों ही पार्टियां अपने कोर वोट बैंक को एक दूसरे को ट्रांसफ़र नहीं करवा पाई इसका परिणाम यह हुआ कि लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद ही बसपा इस गठबन्धन से अलग हो गयीहालांकि सपा और रालोद का गठबन्धन जारी रहा और लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेश में हुए उपचुनावों में दोनों दल साथ मिलकर लड़े, जिसमें इस गठबन्धन ने भाजपा को मजबूत टक्कर दी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े पत्रकार और यहां की राजनीति पर बारीक नजर रखने वाले विजेन्द्र चौधरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े पत्रकार और यहां की राजनीति पर बारीक नजर रखने वाले विजेन्द्र चौधरी कहते हैं कि सपा -रालोद गठबंधन उत्तर प्रदेश में कमाल कर सकता है, वशर्ते यह जमीन पर उतरे। यहां के राजनैतिक समीकरण इस गठबन्धन को स्वाभाविक बनाते हैं। दोनों ही पार्टियां पूर्व प्रधानमंत्री और देश के बड़े किसान नेता रहे चौधरी चरण सिंह के पुराने लोकदल से निकली हैं और उन्हें व उनकी नीतियों को अपना आदर्श मानती है। अगर पिछले एक-दो चुनावों को छोड़ दिया जाये, तो क्षेत्र के मुस्लिम-जाट एक होकर मतदान करते रहे हैं और यही पहले चौधरी चरण सिंह और फ़िर बाद में उनके बेटे चौधरी अजित सिंह की पार्टियों की जीत का समीकरण बनाते रहे हैं। बिजनौर में किसान मजदूर महासम्मेलन के साथ ही दोनों नेता चौधरी चरण सिंह की पत्नी के नाम पर खुल रहे माता गायत्री देवी हास्पिटल का भी उद्घाटन करेंगे। बिजनौर जिले में यह हास्पिटल अपनी तरह का अनौखा हास्पिटल होगा, जिसमें क्षेत्र के लोगों को पास ही में बेहतर चिकित्सा मिल सकेगी, वो भी रियायती दरों पर अभी तक बिजनौर जिले में चिकित्सा की स्थिति कोई खास बेहतर नहीं है और लोग बेहतर इलाज के लिए मुरादाबाद, मेरठ और दिल्ली की ओर रूख करते है। 

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